Friday, 2 December 2011

akela

मैं अकेला चला जा रहा हूँ,
किसी साथ पाने के लिए,
दीन-दुनिया से होकर बेखबर,
अपनी ही धुन में बढा चला जा रहा हूँ,

मै अकेला चला जा रहा हूँ,
बेख़ौफ़ मस्ती में खोकर,
जिंदगी की राह में,
सबको पीछे छोड़ता हुआ आगे बढ़ा चला जा रहा हूँ,

मैं अकेला चला जा रहा हूँ,
हर कहानी- किस्से को भूलकर,
इस सुनसान पथ पर,
अनकही बातों को पीछे छोड़ता  हुआ आगे बढा चला जा हूँ,

मैं अकेला चला जा रहा हूँ,
हर बीती बात को भूलकर,
हर गम को अपने अन्दर समेटे हुए,
हरेक लम्हे को पीछे छोड़ता हुए आगे बढा चला जा हूँ!

मैं अकेला चला जा रहा हूँ!

Monday, 28 November 2011

dehshat

कहने को तो मैं आजाद हूँ,
फिर भी दहशत के साए में जिया जा रहा हूँ,
कहाँ गए वो मदमस्त दिन,
वो खुशियाँ,
वो खुशहाल बचपन,

कहने को तो मैं आजाद हूँ,
फिर भी दहशत के साए में जिया जा रहा हूँ,
कहीं पर खून बिखरा पड़ा है,
बिखरी पड़ी है लाशें,
हर जगह आतंक का माहौल है,

कहने को तो मैं आजाद हूँ,
फिर भी दहशत के साए में जिया जा रहा हूँ,
कहीं पर हर बच्चा-बच्चा डरा है,
डरी हुई है हर माँ,
आतंक से पीड़ित है हर जगह,

कहने को तो मैं आजाद हूँ,
फिर भी दहशत के साए में जिया जा रहा हूँ,
कहीं  पर आतंक से बेहाल है हर घर,
मिट गया है हर घर का चिराग,
खामोश है हर गलियां,

कहने को तो मैं आजाद हूँ,
फिर भी दहशत के साए में जिया जा रहा हूँ!